पहली बार एक रेस्टोरेंट में मिले थे सोनिया और राजीव, इंदिरा गांधी के सामने पहुंची तो पैर कांपने लगे | Sonia and Rajiv met for the first time in a restaurant, when they reached in front of Indira Gandhi, their feet started trembling.


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24 मिनट पहलेलेखक: राजेश साहू और रक्षा सिंह

आज राजीव गांधी की जयंती है। 20 अगस्त 1944 को उनका जन्म मुंबई में हुआ था। जयंती के इस मौके पर हम उनकी और सोनिया गांधी की लव स्टोरी के बारे में जानेंगे। बताएंगे कि कैसे दोनों एक रेस्टोरेंट में मिले और पहली नजर में ही प्यार हो गया। आइए शुरू से जानते हैं।

1965 का साल था। 21 साल के राजीव गांधी पढ़ाई के लिए कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज पहुंचे। उसी साल कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के लेनॉक्स कुक स्कूल में अंग्रेजी भाषा सीखने इटली से एंटोनिया अलबिना मायनो यानी सोनिया गांधी आई थीं। दोनों के कैंपस अलग थे। सोनिया उबली पत्तागोभी, आलू, ऑमलेट और ब्रेड के साथ टोमैटो सॉस खाकर ऊब गई थीं, इसलिए वह यूनिवर्सिटी के रेस्टोरेंट में खाना खाती थीं।

एक दिन सोनिया अपनी सहेली के साथ बैठीं थीं तभी उनका दोस्त क्रिस्टियन वान स्टेगालिट्ज राजीव गांधी के साथ रेस्टोरेंट के अंदर पहुंचा। क्रिस्टियन ने सोनिया से कहा, “आज मैं आपको अपने दोस्त से मिलवाना चाहता हूं, ये भारत से आए हैं और इनका नाम राजीव है।” राजीव ने हाथ आगे हाथ बढ़ाया तो सोनिया ने शर्माते हुए हाथ मिला लिया। बस यहीं से शुरू हुई राजीव और सोनिया की लव स्टोरी…

राजीव और सोनिया की पहली मुलाकात कॉलेज कैंटीन में हुई थी। पहली बार देखते ही राजीव को सोनिया से प्यार हो गया।

पहली मुलाकात में ही राजीव ने सोनिया से शादी करने का फैसला ले लिया
राजीव और सोनिया एक ही जगह थे पर दोनों ने एक दूसरे से कुछ बोला नहीं। राजीव और क्रिस्टियन एक अलग टेबल पर बैठकर लंच करने लगे। राजीव प्लेट से ज्यादा सोनिया को देखे जा रहे थे। लंच कर चुके तो क्रिस्टियन ने पूछा, क्या वह तुम्हें पसंद है? वह एक इटालियन हैं? राजीव ने कहा, “हां, पहले मेरा परिचय तो करवा दो।”

सोनिया गांधी की जीवनी ‘द रेड साड़ी’ में जेवियर मोरो लिखते हैं, “राजीव ने उसी दिन तय कर लिया था कि सोनिया ही आगे उनकी जीवन साथी बनेंगी। उन्होंने उसी दिन दोपहर में सोचा कि आज सभी एली शहर घूमने जाएंगे। वहां बेनेडिक्टाइन मठ के अंदर एक सुंदर गिरजाघर था। सोनिया मना करना चाहती थीं, लेकिन मना करने की कोई वजह नहीं मिली। इसलिए हामी भर दी।”

कमरे पर पहुंचीं तो बदल गया सोनिया का ख्याल
जब राजीव के साथ घूमकर सोनिया अपने कमरे पर पहुंचीं तो साथ बिताया वक्त उनके दिमाग में घूम रहा था। वह राजीव की मुस्कान को भूल नहीं पा रही थीं। वह बार-बार खुद से ही सवाल करतीं कि क्या पहली ही नजर में इस तरह प्यार हो सकता है? फिर खुद ही जवाब देतीं, “नहीं-नहीं ऐसा कैसे हो सकता है! किसी लड़की को ऐसे किसी लड़के के प्यार में नहीं पड़ना चाहिए।”

जेवियर मोरो की लिखी यह किताब बहुत चर्चा में रही, इसे बैन करने की भी कोशिश की गई।

जेवियर मोरो की लिखी यह किताब बहुत चर्चा में रही, इसे बैन करने की भी कोशिश की गई।

सोनिया ने तय कर लिया कि अब राजीव से कभी नहीं मिलना
मुलाकात के बाद सोनिया फ्यूचर को लेकर टेंशन में आ गई। जेवियर मोरो लिखते हैं, “सोनिया के दिमाग में चल रहा था कि राजीव ना यूरोप के हैं ना USA के। वह तो भारत के हैं। जहां का रीति-रिवाज एकदम अलग। वहां कैसे रह पाऊंगी?” इन सब सवालों के बीच सोनिया राजीव की मुस्कान नहीं भूल पा रही थीं। नतीजा ये हुआ कि सोनिया न चाहते हुए उनसे मिलने लगीं और दोनों के बीच प्यार हो गया।

राजीव के प्रपोजल को सोनिया ने दिल से स्वीकार किया
राजीव गांधी सोनिया को ला फ्लाॉ डू मॉल नाम के सबसे अच्छे नाइट क्लब में ले जाना चाहते थे। लेकिन इसके लिए उनके पास पैसे नहीं थे इसलिए वो उन्हें क्रिस्टियन के लाउंज में गए। यहां काफी वक्त तक साथ बैठे रहे। डांस किया। रात के 11 बज गए। सोनिया साइकिल से नहीं आई थीं। बारिश भी हो चुकी थी। राजीव ने तय किया कि पैदल ही छोड़ने चलेंगे। दोनों साथ पैदल निकले। यहीं राजीव ने दिल खोल दिया। प्रपोज कर दिया। सोनिया ने प्रपोजल को मुस्कुराते हुए स्वीकार कर लिया।

सोनिया गांधी भारतीय रीति-रिवाजों से घबराई हुईं थीं, लेकिन उन्हें भी राजीव से प्यार हो गया था।

सोनिया गांधी भारतीय रीति-रिवाजों से घबराई हुईं थीं, लेकिन उन्हें भी राजीव से प्यार हो गया था।

राजीव ने मां को पत्र लिखकर बताया, “मुझे वो लड़की मिल गई जिससे शादी करूंगा”
21 साल के राजीव ने जुलाई 1965 में सोनिया गांधी को लेकर पहली बार मां इंदिरा गांधी को पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने लिखा, “आप मुझसे यहां मिलने वाली लड़कियों के बारे में हमेशा पूछा करती हैं कि मैं यहां किसी से मिला या नहीं। मैं आपको बताना चाहता हूं कि ऐसी ही एक खास लड़की से मेरी मुलाकात हुई है, अभी उससे पूछा तो नहीं है पर यही वह लड़की है जिससे मैं शादी करना चाहूंगा।”

इंदिरा ने कहा, जरूरी नहीं जिस पहली लड़की से मिलो वह सबसे बेहतर ही हो
राजीव का पत्र पढ़ने के बाद इंदिरा ने जवाबी पत्र में लिखा, “यह जरूरी नहीं कि आप जीवन में जिस पहली लड़की से भेंट करें वही आपके लिए सबसे बेहतर हो। मैं लंदन आकर मिलती हूं।” इंदिरा गांधी इस पत्र के जरिए अपने 21 साल के बेटे का जुनून कम करना चाहती थीं। उन्हें यह भी पता था कि राजीव की पसंद ऐसी नहीं हो सकती जिसे पहली नजर में खारिज किया जा सके।

राजीव ने सोनिया को इंदिरा गांधी से मुलाकात की बात बताई तो सोनिया डर गईं। वह साहस ही नहीं जुटा पा रही थी कि अपने घर पर कैसे बताऊं।

शीशे के सामने खड़ी होकर प्रैक्टिस करने लगी थी सोनिया

अपने माता-पिता को राजीव के बारे में बताने से पहले सोनिया शीशे के सामने खड़े होकर प्रैक्टिस करती थीं।

अपने माता-पिता को राजीव के बारे में बताने से पहले सोनिया शीशे के सामने खड़े होकर प्रैक्टिस करती थीं।

जुलाई 1965 में राजीव और सोनिया पहली बार अलग हुए। सोनिया अपने घर इटली के लुसियाना पहुंची। हर वक्त सोनिया के दिमाग में यही चल रहा था कि वह राजीव के बारे में घर पर कैसे बताएं। इसके लिए वह शीशे के आगे प्रैक्टिस करतीं।

एक दिन हिम्मत दिखाते हुए सोनिया मम्मी-पापा के सामने खड़ी हुईं। राजीव से मुलाकात के बारे में सब बता दिया। आखिर में कहा, “मैं राजीव से प्यार करने लगी हूं।” मां ओला मायनो ने पूछा, “लड़के की उम्र क्या है?” सोनिया ने कहा, “21 साल।” ओला मायनों ने कहा, लड़का तो कम उम्र का है, ऊपर से दूसरे देश का है। इतना कहते हुए उन्होंने स्टीफेनो की तरफ देखा। उन्होंने कोई उत्साह नहीं दिखाया। ऐसा रिएक्ट किया जैसे सोनिया को कोई दौरा पड़ा हो और कुछ देर में ठीक हो जाएगी।

इंडियन एंबेसी की सीढ़िया चढ़ते हुए सोनिया के पैर कांप रहे थे

जब सोनिया इंदिरा गांधी से पहली बार मिलने जा रहीं थीं तो उनके पैर कांप रहे थे।

जब सोनिया इंदिरा गांधी से पहली बार मिलने जा रहीं थीं तो उनके पैर कांप रहे थे।

नवबंर 1965, राजीव गांधी सोनिया के साथ कैंब्रिज कॉलेज से इंडियन एंबेसी के लिए निकले। वहां एक रिसेप्शन पार्टी थी जिसमें इंदिरा गांधी मौजूद थी। सोनिया पूरे रास्ते राजीव से अजीब सवाल करती रहीं, कैसे मिलूंगी? क्या कहूंगी? मैं कुछ गलत बोल दी तो? उन्होंने डांट लगा दी, तो? राजीव लगातार समझाते रहे। आखिर में कहा, फालतू की बात मत करो, सब सही होगा।

गाड़ी से उतरकर सोनिया सीढ़िया चढ़ने लगी तो पांव कांप रहे थे। उन्होंने राजीव का हाथ थामा और कहा, माफ करना हम अंदर नहीं जा पाएंगे। राजीव ने सोनिया को संभाला और अंदर ले गए। रेशमी साड़ी पहने इंदिरा गांधी सोनिया को देखते ही समझ गई कि वह डरी हुई है, इसलिए उन्होंने सहज होने का अवसर दिया। सोनिया बेहतर फील करे इसलिए इंदिरा ने फ्रेंच में बात की। थोड़ी ही देर में सोनिया सहज हो गई।

सोनिया का ड्रेस फटा तो इंदिरा ने सिल दिया
राजीव और सोनिया को किसी पार्टी में जाना था। सोनिया ड्रेस बदलकर बाहर निकलीं तभी ड्रेस पैर में फंस गया और सिलाई उखड़ गई। इंदिरा गांधी ने खुद ही ड्रेस को पकड़ा। धागे और सुई से उसकी सिलाई कर दी। यह वाकया सोनिया गांधी को बहुत प्रभावित कर गया। उनके अंदर जो थोड़ा बहुत डर था वह भी खत्म हो गया।

प्यार के चक्कर में राजीव सभी सब्जेक्ट में फेल हो गए

सोनिया के प्यार में पड़े राजीव कॉलेज में सभी सब्जेक्ट्स में फेल हो गए।

सोनिया के प्यार में पड़े राजीव कॉलेज में सभी सब्जेक्ट्स में फेल हो गए।

राजीव गांधी प्यार में इतने मशगूल हो गए कि ट्रिनिटी कॉलेज की पढ़ाई का ध्यान ही नहीं रहा। सभी विषयों में फेल हो गए। अब वह कभी भी साइंटिस्ट नहीं बन सकते थे। राजीव ने कैंब्रिज कॉलेज छोड़ा और इंपीरियल कॉलेज में आ गए। यहां से वह इंजीनियरिंग और मैकेनिक्स की पढ़ाई करने लगे। सोनिया से बातचीत या प्यार यहां भी कम नहीं रहा। दूसरी तरफ लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बाद इंदिरा गांधी पीएम बन चुकी थीं।

राजीव ने सोनिया के पिता से कहा, “मैं आपकी बेटी से शादी करना चाहता हूं”
राजीव गांधी सोनिया के घर पहुंचे। सभी डायनिंग टेबल पर बैठे थे तभी राजीव ने स्टीफेनो से कहा, “मैं आपको बताने आया हूं कि मैं आपकी बेटी से शादी करना चाहता हूं।” सोनिया दंग रह गईं। खाना खा रही मां के हाथ ठहर गए। पिता ने कहा, “मुझे तुम्हारे प्रस्ताव व ईमानदारी पर कोई शक नहीं है। मैं अपनी बेटी को लेकर चिंतित हूं। यह जानती नहीं कि इसे क्या चाहिए। मुझे लगता है कि यह भारत के जीवन की आदी नहीं हो पाएगी।”

इंदिरा गांधी सोनिया के स्वभाव से प्रभावित थीं, इसलिए वह चाहती थीं कि राजीव की उनसे शादी हो जाए।

इंदिरा गांधी सोनिया के स्वभाव से प्रभावित थीं, इसलिए वह चाहती थीं कि राजीव की उनसे शादी हो जाए।

राजीव ने स्टीफेन मायनों से कहा, आप सोनिया को कुछ दिन के लिए हमारे साथ भारत जाने दें। वह वहां चलकर खुद ही फैसला कर लेगी कि उसके लिए क्या सही होगा। सोनिया के पिता ने कुछ देर चुप रहने के बाद कहा, “सोनिया अभी 20 साल की है, जब 21 साल की हो जाएगी तब भेजा जाएगा।”

सोनिया के परिवार ने शर्त के साथ उन्हें भारत भेजा
सोनिया के 21 साल होने के ठीक 33 दिन बाद 12 जनवरी 1968 को उनके परिवार ने उन्हें दोबारा एक महीने के लिए भारत जाने की अनुमति दे दी। पिता स्टीफेनो मायनो और मां पाओलो मायनो अपनी दोनों बेटियों के साथ मिलान के मालपेंसा एयरपोर्ट पर सोनिया को छोड़ने आए। साढ़े छह हजार किलोमीटर दूर के सफर पर सोनिया अकेले निकलीं। रास्ते पर उनके दिमाग में यह चलता रहा कि कहीं एक-दूसरे की उम्मीद पर खरे नहीं उतरे तो? राजीव बदल गए तो? उत्साह के बीच डर कम नहीं हो रहा था।

पहले तीन दिन में सोनिया का डर खत्म हो गया
सोनिया एयरपोर्ट से सफदरगंज रोड स्थित राजीव गांधी के घर पहुंचीं। पूरे घर में सुंदर फूलों के पौधे लगाए गए थे। पहले दिन मुलाकातों का दौर चला। इसके बाद शाम को राजीव अपनी लेम्ब्रेटा स्कूटर से सोनिया को घुमाने लेकर चले गए। लोधी गार्डन गए। इंडिया गेट देखा। 1444 में बने मुहम्मद शाह और ताल के मकबरे के आसपास की खूबसूरती देखी। जामा मस्जिद के पास रंगीन कपड़ों की दुकानें देखीं। भीड़ देखकर रोमांचित हो गईं।

सोनिया सोच में पड़ गईं कि आखिर अभी तक उन्हें भारत के नाम पर क्यों डराया जा रहा था। यहां तो सब कुछ कितना बढ़िया है। सोनिया के लिए वहां दिख रही सभी चीजें विचित्र थी। जितना बारीकी से वह लोगों को देखतीं, लोग भी उन्हें उनके कपड़ों और बोली के कारण उन्हें देखते। कुछ दिन बाद ही उन्हें एहसास हो गया कि लोगों के इस आकर्षण की बड़ी वजह विदेशी होने के साथ गांधी परिवार से नाम जुड़ना भी है।

सोनिया को भारत पसंद आने लगा था। उन्होंने राजीव से शादी करने का फैसला किया।

सोनिया को भारत पसंद आने लगा था। उन्होंने राजीव से शादी करने का फैसला किया।

शादी के लिए सोनिया ने पत्र लिखा पर पिता नहीं आए
सोनिया को भारत और राजीव पसंद आ गए। जीवनभर साथ रहने फैसला करते हुए शादी के लिए हां कर दी। 25 फरवरी को शादी की डेट तय हुई। इंदिरा गांधी चाहती थी कि विदेशी लड़की से शादी का मामला राष्ट्रीय स्तर पर नहीं जाना चाहिए। सोनिया ने अपने घर के लिए पत्र लिखा। सभी को शादी में आने के लिए कहा।

इसी दौरान तूरीन के ‘ला स्टाम्पा’ के एक पत्रकार ने खबर चला दी कि इस शादी की बात से सोनिया का परिवार बेहद तनाव से गुजर रहा है। देखते ही देखते इटली की मीडिया वहां इकट्ठा हो गई। सोनिया के पिता स्टीफेन मायनो ने कहा, “शादी का सवाल है तो बेहतर होगा कि शादी के बाद बात करें या फिर उसके बाद भी न करें।” उन्होंने शादी में नहीं आने की बात कह दी।

सोनिया ने पत्रकार को डांट दिया
इटली से शादी में शामिल होने सोनिया की मां, दोनों बहनें और मामा आए। शादी से पहले अशोका होटल के पियरे कार्डिन फैशन शो में सभी पहुंचे थे। सोनिया प्रिंटेड रेशमी साड़ी पहनकर राजीव और संजय के बीच बैठी थीं। सोनिया बाहर निकलने लगी तभी एक पत्रकार ने राजीव को लेकर सवाल पूछ लिया। सोनिया ने अंग्रेजी में कहा, “I am marrying Rajiv Gandhi not the Prime Minister’s son.” यानी मैं पीएम के बेटे से नहीं, राजीव नाम के युवक से शादी करने जा रही हूं।

नेहरू की बुनी साड़ी पहनकर सोनिया ने की शादी
25 फरवरी की शाम 6 बजे सफदरगंज रोड के उद्यान नंबर एक में शादी हुई। सोनिया ने शादी में इंदिरा की पसंद की साड़ी पहनी। यह वही साड़ी थी जिसे जवाहर लाल नेहरू ने जेल में रहते हुए अपनी बेटी इंदिरा की शादी के लिए बुना था। सोनिया ने इसे लंदन में नेहरू प्रदर्शनी में देखा था। वो लाल साड़ी पहनने के बाद सोनिया को विश्वास हो गया था कि वह भारत के इतिहास का एक अंग बन गई हैं।

शादी में पत्रकारों की मौजूदगी पर उखड़ गए राजीव
राजीव को जब पता चला कि उपस्थित करीब 200 मेहमानों के बीच 2 पत्रकार भी हैं तो उन्हें गुस्सा आ गया। उन्होंने कमरे से बाहर आने से मना कर दिया। कहा, जब तक उन दोनों को निकाला नहीं जाता मैं बाहर नहीं आऊंगा। इंदिरा ने उन्हें समझाने की कोशिश की तो वह पहले भड़के फिर शांत हुए। तभी उन्हें सोनिया गांधी अपने मामा मारियो के साथ आती दिखीं। उनका चेहरा चमक रहा था। राजीव उन्हें देखकर दंग रह गए। गुस्सा भूल गए।

3 साल साथ रहने के बाद राजीव और सोनिया की शादी हुई। सोनिया के पिता शादी में शामिल नहीं हुए थे।

3 साल साथ रहने के बाद राजीव और सोनिया की शादी हुई। सोनिया के पिता शादी में शामिल नहीं हुए थे।

एक दूसरे को जयमाल पहनाकर वे फूलों के बनाए मंडप में पहुंचे। सिविल विवाह के लिए रजिस्टर पर सिग्नेचर किया। एक दूसरे को अंगूठी पहनाई। सोनिया अपने भाव को कंट्रोल करने की पूरी कोशिश कर रही थीं, लेकिन तभी मां को देखा तो रोने लगीं। मां ने गले लगा लिया। शादी में कोई पादरी नहीं था। राजीव ने ऋग्वेद के कुछ अंश पढ़े, वह था…

मंद-मंद चलती है पवन,
मंद-मंद बहती है,
नदी ईश्वर करे कि दिन और रात हमारे लिए प्रसन्नता का वरदान लाए,
धरती की धूल हमारे लिए प्रसन्नता का वरदान लाए,
वृक्ष अपने फलों से हमें प्रसन्न रखें,
सूर्य अपनी किरणों से हमें प्रसन्नता का वरदान दें…

और इस तरह से राजीव और सोनिया एक दूसरे के हो गए।

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