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श्रीदेवी के लिए अफगानिस्तान में रुक जाती गोलीबारी: 10 साल की उम्र में रजनीकांत की मां का रोल किया, शूटिंग पर साथ जाती थी टीचर


20 मिनट पहलेलेखक: ईफत कुरैशी

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13 अगस्त 1963। आज से ठीक 60 साल पहले दिवंगत एक्ट्रेस श्रीदेवी का जन्म तमिलनाडु के एक छोटे से गांव मीनमपट्टी में हुआ और उन्हें नाम दिया गया श्री अम्मा यंगर अयप्पन। पिता अयप्पन एक वकील थे और मां राजेश्वरी घर संभालती थीं।

जैसे- जैसे श्रीदेवी बड़ी होती गईं, तो परिवार ने भांप लिया कि वो दूसरे बच्चों से बेहद अलग हैं। घर में जो भी मेहमान पहुंचता, उसके जाते ही श्रीदेवी उसकी नकल उतारतीं और सबको हंसातीं। इसी हुनर की बदौलत श्रीदेवी ने पहले साउथ और फिर देशभर में पहचान हासिल की।

आज श्रीदेवी की 60वीं बर्थ एनिवर्सरी पर पढ़िए उनकी बेहतरीन कहानी-

फिल्म कंधन करुनई में श्रीदेवी।

फिल्म कंधन करुनई में श्रीदेवी।

बात 1996 की है… तमिल में बनने वाली हिंदू माइथोलॉजिकल फिल्म ‘कंधन करुनई’ में साउथ सुपरस्टार जेमिनी गणेशन, शिवाजी गणेशन, सावित्री, जे. जयललिता को कास्ट किया गया। फिल्म में एक्टर विजयकुमार, मुरुगन (भगवान कार्तिकेय) का रोल प्ले करने वाले थे। हालांकि उन्हें दूसरे रोल में कास्ट कर लिया गया। जब एक बाल कलाकार की अर्जेंट जरूरत पड़ी तो किसी ने मेकर्स को श्रीदेवी का नाम सुझाया, जो उस वक्त महज 3 साल की थीं।

फिल्म से जुड़े लोग श्रीदेवी से मिलने पहुंचे और अभिनय देखकर उन्हें तुरंत मुरुगन के रोल में कास्ट कर लिया गया। फिल्म के लिए मेकर्स चाहते थे कि श्रीदेवी का सिर मुंडवाया जाए, लेकिन उनकी मां अड़ गईं कि बेटी के बाल नहीं कटने देंगी। ऐसे में मेकर्स ने उनका लुक बदल दिया। फिल्म कंधन करुनई 1967 में रिलीज हुई, तब श्रीदेवी 4 साल की हो चुकी थीं। ये फिल्म जबरदस्त हिट रही और श्रीदेवी के पास कई फिल्में के ऑफर आने लगे।।

1971 की मलयालम फिल्म पूमपट्टा के लिए श्रीदेवी को केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड फॉर बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट मिला।

1971 की मलयालम फिल्म पूमपट्टा के लिए श्रीदेवी को केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड फॉर बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट मिला।

डबल शिफ्ट में काम करती थीं श्रीदेवी, पढ़ाई के लिए साथ चलते थे टीचर

बतौर बाल कलाकार श्रीदेवी के पास इतनी फिल्में हुआ करती थीं कि वो एक साथ डबल शिफ्ट में काम किया करती थीं। लगातार फिल्मों में काम करते हुए श्रीदेवी की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ने लगा, जिससे उनके पिता काफी नाराज होते थे।

पढ़ाई न छूटे ऐसे में जब भी वो शहर से बाहर शूटिंग करने जातीं, तो पिता स्कूल का एक टीचर उनके साथ भिजवाते। शूटिंग ब्रेक में ही श्रीदेवी पढ़ाई करती थीं। समय के साथ श्रीदेवी के लिए पढ़ाई और एक्टिंग के बीच तालमेल बैठाना मुश्किल होता चला गया और उन्होंने दोनों के बीच एक्टिंग को चुना।
10 साल की उम्र में हीरोइन बनीं, के. बालाचंदर की फिल्म मिली

एक दिन श्रीदेवी अपने घर में थीं कि अचानक उस जमाने के मशहूर सिनेमैटोग्राफर बालू महेंद्र आए। वही बालू महेंद्र जिन्होंने सालों बाद श्रीदेवी के साथ फिल्म सदमा बनाई। उन्होंने श्रीदेवी की मां से कहा कि क्या आपके घर में कोई साड़ी है, जो आप श्रीदेवी को पहना सकती हैं।

मां ने तुरंत एक साड़ी निकाली और 10 साल की श्रीदेवी को पहना दी। उन लोगों ने श्रीदेवी को देखा और बिना कुछ जवाब दिए चले गए। घर वाले भी सोच में पड़ गए कि आखिर इतनी छोटी बच्ची को साड़ी क्यों पहनाई गई।

श्रीदेवी ने 8 साल की उम्र में बॉलीवुड फिल्म रानी मेरा नाम में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया था। ये उनकी पहली हिंदी फिल्म थी।

श्रीदेवी ने 8 साल की उम्र में बॉलीवुड फिल्म रानी मेरा नाम में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया था। ये उनकी पहली हिंदी फिल्म थी।

अगले दिन श्रीदेवी एक फिल्म की शूटिंग करने एक स्टूडियो गईं। अमूमन श्रीदेवी के साथ उनकी मां राजेश्वरी सेट पर जाया करती थीं। वो दोनों जैसे ही स्टूडियो में दाखिल हुए तो हर कोई उनकी मां को बधाई देते हुए कह रहा था- मुबारक हो, आपकी बेटी हीरोइन बन गई। दरअसल मशहूर फिल्ममेकर के. बालाचंदर ने श्रीदेवी को महज 10 साल की उम्र में अपनी फिल्म की लीड हीरोइन बना लिया था।

मां नहीं चाहती थीं कि कम उम्र में हीरोइन बनें श्रीदेवी

10 साल की श्रीदेवी के लिए ये भले ही बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन उनकी मां इससे खुश नहीं थीं। उन्हें लगता था कि श्रीदेवी अभी यंग रोल निभाने के लिए ठीक नहीं हैं और उन रोल्स से उन पर बुरा असर पड़ सकता है। हालांकि लोगों के समझाने के बाद वो राजी हो गईं। श्रीदेवी ने 1975 की फिल्म मूंदरू मुदिचु से बतौर लीड तमिल सिनेमा में डेब्यू किया। जिस समय फिल्म रिलीज हुई उस समय वो महज 13 साल की थीं।

10 साल की उम्र में निभाया था रजनीकांत की मां का रोल

फिल्म मूंदरू मुदिचू में 10 साल की श्रीदेवी ने रजनीकांत की सौतेली मां का रोल प्ले किया था, जो अपनी बहन की मौत का बदला लेने के लिए रजनीकांत के पिता से शादी कर उन्हें सबक सिखाती है। ये फिल्म जबरदस्त हिट रही थी।

फिल्म में पहली बार रजनीकांत मेजर रोल में दिखे थे। जिस समय श्रीदेवी बतौर लीड नजर आईं, उस दौरान भी उनकी बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट फिल्में रिलीज हो रही थीं। पहली ही फिल्म से श्रीदेवी को साउथ इंडस्ट्री में पहचान मिल गई थी।

श्रीदेवी ने 8 साल की उम्र में बॉलीवुड फिल्म रानी मेरा नाम में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया था। ये उनकी पहली हिंदी फिल्म थी

श्रीदेवी ने 8 साल की उम्र में बॉलीवुड फिल्म रानी मेरा नाम में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया था। ये उनकी पहली हिंदी फिल्म थी

16 साल की उम्र में किया बॉलीवुड डेब्यू, फ्लॉप रही थी फिल्म

साउथ में पहचान बनाने के बाद श्रीदेवी ने 1979 की फिल्म सोलवां सावन से बॉलीवुड डेब्यू किया। ये तमिल फिल्म 16 व्याथिनिले (1977) की हिंदी रीमेक थी, जिसमें श्रीदेवी ही लीड रोल में थीं। पहली बॉलीवुड फिल्म फ्लॉप रही, जिसके बाद श्रीदेवी ने कई हिंदी फिल्में ठुकरा दीं। 4 साल बाद फिल्म हिम्मतवाला से श्रीदेवी ने दमदार वापसी की।

ये उस साल की सबसे बड़ी फिल्म साबित हुई, जिसमें श्रीदेवी के साथ जीतेंद्र लीड रोल में थे। फिल्म ने श्रीदेवी को देशभर में पहचान दिला दी और आगे वो फिल्म तोहफा, मास्टर जी, नगीना, जांबाज जैसी कई हिट फिल्मों में नजर आकर स्टार बनीं।

हर फिल्म सिर्फ श्रीदेवी के साथ करना चाहते थे जीतेंद्र

हिम्मतवाला के कामयाब होने के बाद से ही जीतेंद्र को श्रीदेवी का अभिनय इतना पसंद आया कि वो हर फिल्म में सिर्फ उन्हीं के साथ काम करना चाहते थे। यही कारण था कि जीतेंद्र और श्रीदेवी ‘जानी दोस्त’ (1983), ‘जस्टिस चौधरी’ (1983), ‘तोहफा’ (1984), ‘सुहागन’ (1986), ‘धर्माधिकारी’ (1986) और ‘दिल लगाके देखो’ (1988) जैसी फिल्मों में साथ नजर आए।

नैनों में सपना गाने का एक सीन।

नैनों में सपना गाने का एक सीन।

नागिन बनकर जब आंखें खराब हुईं, मन्नत मांगकर बनवाई श्रीदेवी की धर्मशाला

फिल्म नगीना (1986) में श्रीदेवी ने नागिन का रोल प्ले किया। नागिन बनने के लिए उन्हें घंटों सेट पर कॉन्टैक्ट लेंस पहनना पड़ता था, जिससे उनकी आंखें खराब होने लगीं। आंखें ठीक करने के लिए श्रीदेवी ने ऋषिकेश के पास स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर में मन्नत मांगी और वहां अपने खर्च पर 3 कमरे बनवाए। इन कमरों को श्रीदेवी की धर्मशाला कहा जाता है, जहां यात्री ठहरते हैं। फिल्म नगीना से श्रीदेवी सुपरस्टार बन गई थीं।

फिल्म नगीना में श्रीदेवी ने नागिन का रोल निभाया था, जिसे लिए उन्हें लेंस पहनना पड़ता था।

फिल्म नगीना में श्रीदेवी ने नागिन का रोल निभाया था, जिसे लिए उन्हें लेंस पहनना पड़ता था।

मिस्टर इंडिया के लिए मां ने मांगे 10 लाख, बोनी कपूर ने दिए 11 लाख

80 के दशक में श्रीदेवी की फीस उस जमाने की स्टार रहीं रेखा और हेमा मालिनी से भी ज्यादा हुआ करती थी। जब बोनी कपूर श्रीदेवी को फिल्म मिस्टर इंडिया (1987) के लिए कास्ट करने पहुंचे तो श्रीदेवी की मां ने कह दिया कि साइन करना है तो 10 लाख देने होंगे, बोनी कपूर ने श्रीदेवी को कास्ट करने की उत्सुकता दिखाई और कह दिया कि मैं आपको 11 लाख दूंगा।

उस जमाने में हर एक्ट्रेस की फीस 11 लाख से कम थी। बोनी कपूर का ये तरीका देखकर श्रीदेवी की मां ने कहा था कि अगर बोनी कपूर तुम्हें फिर कभी फिल्मों में साइन करें, तो उनसे फीस मत लेना।

फिल्म मिस्टर इंडिया का गाना हवा हवाई इतना फेमस हुआ कि श्रीदेवी को हवा हवाई कहा जाने लगा था।

फिल्म मिस्टर इंडिया का गाना हवा हवाई इतना फेमस हुआ कि श्रीदेवी को हवा हवाई कहा जाने लगा था।

मां के खिलाफ जाकर की थी भीगी साड़ी में शूटिंग

जिस समय श्रीदेवी फिल्म मिस्टर इंडिया के गाने काटे नहीं कटते की शूटिंग कर रही थीं, उस समय उन्हें तेज बुखार था। गाने में उन्हें सिडक्टिव दिखने के लिए नीले रंग की भीगी साड़ी पहनकर डांस करना था। श्रीदेवी की तबीयत को देखते हुए उनकी मां नहीं चाहती थीं कि वो इस गाने की शूटिंग करें, लेकिन वो नहीं मानीं और उन्होंने 102 डिग्री बुखार में गाना पूरा किया।

फिल्म मिस्टर इंडिया के गाने काटे नहीं कटते दिन ये रात का एक सीन।

फिल्म मिस्टर इंडिया के गाने काटे नहीं कटते दिन ये रात का एक सीन।

फिल्म चांदनी से फैशन आइकन बन गई थीं श्रीदेवी

फिल्म मिस्टर इंडिया (1987) में 11 लाख फीस चार्ज करने के बाद श्रीदेवी ने फिल्म चांदनी (1989) के लिए 15 लाख रुपए फीस ली और अपना ही हाईएस्ट पेड एक्ट्रेस का रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस फिल्म में श्रीदेवी के पहने गए डिजाइनर सूट ट्रेंड में आ गए थे। फिल्म का गाना मेरे हाथों में नौ-नौ चूड़ियां हैं आज भी रेडिफ चार्ट के बॉलीवुड के बेस्ट 25 वेडिंग सॉन्ग में है।

फिल्म चांदनी का एक सीन।

फिल्म चांदनी का एक सीन।

पिता के अंतिम संस्कार से लौटकर शूट किया था कॉमेडी सीन

1991 में जब श्रीदेवी के पिता अयप्पन का निधन हुआ तो उस वक्त वो फिल्म लम्हें (1991) की शूटिंग कर रही थीं। श्रीदेवी ने काम से ब्रेक लिया, लेकिन जैसे ही पिता का अंतिम संस्कार हुआ तो अगले ही दिन वो फिल्म के सेट पर पहुंच गईं और उन्होंने फिल्म के लिए एक कॉमेडी सीन दिया। सेट पर श्रीदेवी के अभिनय को देखकर हर कोई दंग था।

1991 में रिलीज हुई फिल्म लम्हे का एक सीन।

1991 में रिलीज हुई फिल्म लम्हे का एक सीन।

103 डिग्री बुखार में किया था बारिश में शूट

श्रीदेवी 80-90 की दशक की सबसे व्यस्त एक्ट्रेस थीं। इनके पास एक साथ इतनी फिल्में रहती थीं कि इन्हें एक दिन में 4 शिफ्ट में काम करना पड़ता था, लेकिन ये काम के लिए इतनी जुनूनी थीं कि यही एंजॉय करती थीं। फिल्म चालबाज (1989) का गाना “न जाने कहां से आई है” शूट करते हुए भी श्रीदेवी को 103 डिग्री बुखार था, इसके बावजूद उन्होंने बारिश में भीगते हुए जबरदस्त डांस मूव्स किए थे।

अफगानिस्तान में श्रीदेवी का नाम सुनकर रुक गई थी गोलीबारी

श्रीदेवी और अमिताभ बच्चन स्टारर फिल्म खुदा गवाह (1992) की शूटिंग अफगानिस्तान के कई हिस्सों में हुई थी। उस समय अफगानिस्तान में जंग के माहौल बने हुए थे, हर तरफ गोली-बारी हो रही थी और मिसाइल का इस्तेमाल होना भी आम था। खौफ में लोगों ने घरों से निकलना तक बंद कर दिया था।

सोवियत ने अफगानिस्तान से कब्जा हटाते हुए देश की जिम्मेदारी नजीबुल्लाह को दी, जो राष्ट्रपति बने। नजीबुल्लाह भारतीय फिल्मों के बड़े प्रशंसक थे, ऐसे में जब अमिताभ-श्रीदेवी की फिल्म शूट करने के लिए उनसे परमिशन मांगी गई, तो वो तुरंत मान गए।

बॉलीवुड बबल के मुताबिक, शूटिंग परमिशन तो मिल गई, लेकिन वहां माहौल बेहद खराब था। जब अमिताभ बच्चन और श्रीदेवी शूटिंग के लिए अफगानिस्तान के बुजकशी की मजार-ए-शरीफ पहुंचे तो राष्ट्रपति नजीबुल्लाह अहमदजई ने अफगानिस्तान की आधी सेना सिर्फ उनक दोनों की सिक्योरिटी में लगा दी।

फिल्म खुदा गवाह के सेट पर ली गई श्रीदेवी और अमिताभ बच्चन की तस्वीर।

फिल्म खुदा गवाह के सेट पर ली गई श्रीदेवी और अमिताभ बच्चन की तस्वीर।

फिल्म की शूटिंग देखने के लिए अफगानिस्तान में लोगों की भीड़ जमा हुआ करती थी। कई बार तो ऐसा भी होता था, जब श्रीदेवी को देखने के लिए अफगानिस्तान में गोलियां चलनी बंद हो जाती थीं और वहां के लोकल लोग बेखौफ शूटिंग देखने घरों से निकल पड़ते थे। शूटिंग खत्म होते ही गोली-बारी फिर शुरू हो जाती थी।

एक बार तो ऐसा भी हुआ कि अफगानिस्तान के मिलिटेंट कमांडर रॉकेट फायर करने वाले थे, लेकिन श्रीदेवी को शूटिंग में दिक्कत न हो, इसलिए उन्होंने फायरिंग रोक दी। यही कारण है कि अफगानिस्तान के लोग श्रीदेवी को शांति का प्रतीक मानते हैं। जब दोनों शूटिंग करके लौट रहे थे तो राष्ट्रपति नजीबुल्लाह ने दोनों को ऑर्डर ऑफ अफगानिस्तान से सम्मानित किया था।

श्रीदेवी की फिल्में देखने के पाकिस्तानियों ने की थी सरकार से बगावत

जनरल जिया-उल-हक जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति बने तो उन्होंने देश में भारतीय फिल्में देखने पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया। यदि कोई भारतीय फिल्में देखता पकड़ा जाता तो उसे जेल भेज दिया जाता और जुर्माना लगता सो अलग। इस बड़े ऐलान के बावजूद श्रीदेवी की लोकप्रियता ने पाकिस्तान में बगावत शुरू करवा दी।

श्रीदेवी पहली इंडियन एक्ट्रेस हैं जिन्हें पर्सनल वैनिटी वैन मिली थी।

श्रीदेवी पहली इंडियन एक्ट्रेस हैं जिन्हें पर्सनल वैनिटी वैन मिली थी।

बीबीसी के पूर्व पाकिस्तानी संवाददाता वुसअत उल्लाह खान ने अपनी एक रिपोर्ट में इसका जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि जब वो कराची यूनिवर्सिटी में थे तो भारतीय फिल्में बैन होने के बावजूद हॉस्टल के बच्चे पैसे इकट्ठा करके VCR लाते और बंद कमरों में श्रीदेवी की फिल्में देखते थे। कई लड़के पकड़े गए और उन्हें जेल भेजा गया, इसके बावजूद हॉस्टल में श्रीदेवी की फिल्में देखना बंद नहीं हुआ।

कई बार तो हॉस्टल के बच्चे सरकार का विरोध करने के लिए जानबूझकर श्रीदेवी की फिल्में फुल वॉल्यूम में देखते थे और कोशिश करते थे कि आवाज सिक्योरिटी गार्ड तक पहुंचे।

मिथुन से शादी की खबरों को मिली थी हवा

एक समय में श्रीदेवी मिथुन चक्रवर्ती के साथ रिलेशनशिप में थीं। फिल्मी खबरियों के मुताबिक दोनों ने शादी भी कर ली थी, हालांकि दोनों के रिश्ते पर कोई पुख्ता खबर कभी नहीं आ सकी।

मिथुन का शक दूर करने के लिए श्रीदेवी ने बांधी थी बोनी कपूर को राखी

मिथुन रिलेशन में रहते हुए भी श्रीदेवी और बोनी कपूर पर शक किया करते थे। यही कारण था कि श्रीदेवी ने बोनी को राखी बांधी थी। इसके कुछ समय बाद ही मिथुन से अलग होकर श्रीदेवी ने बोनी कपूर से शादी कर ली। श्रीदेवी को बोनी कपूर की शादी तोड़ने का दोषी समझा गया, यही कारण था कि बोनी की पहली पत्नी मोना शौरी के निधन के बाद जब श्रीदेवी बोनी के घर आईं तो सौतेले बेटे अर्जुन ने उन्हें सालों तक कबूल नहीं किया। शादी के बाद श्रीदेवी ने फिल्मों से ब्रेक ले लिया था।

श्रीदेवी और बोनी कपूर की शादी की तस्वीर।

श्रीदेवी और बोनी कपूर की शादी की तस्वीर।

अमेरिकन डॉक्टरों की लापरवाही से चली गई मां की याददाश्त

1995 में श्रीदेवी की मां राजेश्वरी को ब्रेन ट्यूमर डिटेक्ट हुआ। मद्रास के डॉक्टर्स के कहने पर श्रीदेवी मां को ऑपरेशन के लिए अमेरिका ले गईं। ऑपरेशन से पहले श्रीदेवी की मां बेहद डरी हुई थीं, लेकिन कुछ घंटों बाद उनका डर सही साबित हुआ। लापरवाही में न्यूरो सर्जन डॉ. एहुद ऑर्बिट ने गलत ऑपरेशन कर दिया। ट्यूमर बाएं हिस्से में था, लेकिन ऑपरेशन दाहिने हिस्से का हुआ। इस लापरवाही से श्रीदेवी की मां की याददाश्त चली गई।

ठीक एक साल बाद 1996 में श्रीदेवी की मां राजेश्वरी का निधन हो गया। ऐसे में उन्होंने उस हॉस्पिटल पर केस किया, जहां उनकी मां के साथ लापरवाही की गई थी। श्रीदेवी केस जीत गईं, डॉक्टर सस्पेंड हुए और उन्हें मुआवजे के 9 करोड़ रुपए मिले।

श्रीदेवी अपनी मां राजेशअवरी के साथ।

श्रीदेवी अपनी मां राजेशअवरी के साथ।

इटली में एक शख्स ने मारा था थप्पड़

श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी कपूर ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि इटली में एक बार एक इटैलियन शख्स ने श्रीदेवी को थप्पड़ मारा था। श्रीदेवी अपनी मां के चेन्नई स्थित घर के लिए फर्नीचर खरीदने गई थीं। दुकान में ही उनकी एक आदमी से कहासुनी होने लगी और बहस इतनी बढ़ गई कि उस शख्स ने इन्हें थप्पड़ मार दिया। जैसे ही दोस्तों ने ये बात बोनी को बताई तो वो दोनों बेटियों को छोड़कर तुरंत फ्लाइट लेकर इटली पहुंच गए थे।

50 साल का करियर, 300 फिल्में और कई अवॉर्ड

श्रीदेवी ने अपने तीन दशक लंबे करियर में लगभग 300 फिल्मों में काम किया। इनमें 63 हिंदी, 62 तेलुगु, 58 तमिल और 21 मलयालम फिल्में शामिल हैं। बोनी कपूर से शादी के बाद श्रीदेवी ने फिल्मों से दूरी बना ली। करीब 15 साल बाद श्रीदेवी ने 2012 की फिल्म इंग्लिश विंग्लिश से बॉलीवुड में दमदार वापसी की। 2017 की फिल्म मॉम इनकी 300वीं फिल्म बनी। अफसोस कि ये श्रीदेवी की आखिरी फिल्म साबित हुई।

शादी में दुबई गई थीं, लौटी ही नहीं

फरवरी 2018 में श्रीदेवी अपने भतीजे मोहित मारवाह की शादी अटेंड करने परिवार के साथ दुबई गई थीं। परिवार भारत लौट आया, लेकिन श्रीदेवी शॉपिंग के लिए दुबई में ही रुक गईं। 24 फरवरी को श्रीदेवी ने पति बोनी कपूर को कॉल किया और कहा पापा (प्यार से श्रीदेवी बोनी को इस नाम से बुलाती थीं) आई एम मिसिंग यू। बोनी भी श्रीदेवी से मिलना चाहते थे तो उन्होंने सरप्राइज देने का फैसला किया और दोपहर 3ः30 बजे की फ्लाइट लेकर दुबई रवाना हो गए।

लैंडिंग होते ही 6ः20 बजे बोनी होटल पहुंचे। दोनों ने करीब आधे घंटे बातचीत की और डिनर पर जाने का फैसला किया। श्रीदेवी तैयार होने के लिए उठीं और बाथरूम चली गईं। पति बोनी लिविंग एरिया में ही उनका इंतजार करने लगे। 10 मिनट का इंतजार 15 मिनट और फिर 20 मिनट में बदल गया, लेकिन श्रीदेवी बाहर ही नहीं आईं। दोनों पहले ही डिनर के लिए लेट हो चुके थे, लेकिन अंदर से श्रीदेवी जवाब ही नहीं दे रही थीं।

बोनी कपूर जब दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुए तो दिल दहला देने वाला मंजर सामने था। बाथटब में श्रीदेवी डूबी हुई बेसुध पड़ी थीं। बोनी ने उन्हें निकाला और अपने दोस्त को कॉल किया। कुछ समय बाद पुलिस भी पहुंच गई। श्रीदेवी को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

श्रीदेवी की अंतिम यात्रा की तस्वीर।

श्रीदेवी की अंतिम यात्रा की तस्वीर।

अनिल अंबानी की मदद से भारत लाया गया था शव

3 दिनों तक इन्वेस्टिगेशन के बाद 27 फरवरी 2018 को श्रीदेवी डेथ केस दुबई पुलिस ने बंद कर दिया। इसी दिन पति बोनी कपूर और बेटा अर्जुन कपूर, अनिल अंबानी के प्राइवेट जेट से श्रीदेवी का शव लेकर मुंबई पहुंचे। 2013 में पद्मश्री से सम्मानित हो चुकीं श्रीदेवी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई और इन्हें गन सैल्यूट मिला।

बॉलीवुड का चौथा सबसे बड़ा अंतिम संस्कार

श्रीदेवी के अंतिम दर्शन के लिए ऐसी भीड़ उमड़ी थी कि पुलिस को लाठीचार्ज कर भीड़ को काबू करना पड़ा। सड़कों पर इतने लोग शोक मनाने इकट्ठा हुए कि इसे भारत का चौथा सबसे बड़ा अंतिम संस्कार कहा गया। इससे पहले सिंगर मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, राजेश खन्ना के अंतिम संस्कार में ऐसी भीड़ देखी गई थी। 3 मार्च को श्रीदेवी की अस्थियां रामेश्वरम में विसर्जित की गईं।

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